Monday, August 12, 2019

क्यों करें भगबान अर्धनारीश्वर की पूजा?

क्यों करें भगबान अर्धनारीश्वर की पूजा?
शक्ति के विना शिव,शिव नहीं-शव हैं:-
अक्षर शिव है तथा मात्राएँ शक्ति हैं, यदि शि व मे छोटी’इ’की मात्रा अर्थात शक्ति को को साथ मे न जोड़े तो शव होता है अगर शक्ति को साथ जोड़ दें तो शव,शिव हो जाता है। यही विष्टता है,कि शिव शरीर मात्र हैं और शक्ति उसमे आत्मा हैं,जब शरीर मे प्राण ही नहीं होंगे तो शरीर किस काम का अत:शरीर कि महत्ता तब है जब उसमे प्राण हैं,शिव मे यही प्राण तो शक्ति है।      इस प्रकार यदि हम शिव कि पूजा शक्ति के विना करते हैं तो हमे पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है। और साथ ही हमे यह भी समझना चाहिए कि शिव कि प्रसन्नता शक्ति मे है। और जब हम शक्ति को साथ नहीं पूजेंगे तो फिर शिव प्रसन्न कैसे होंगे ? और जब शिव प्रस्न्न नही हुए तब तो हमारा हर सार्थक प्रयास निरर्थक हो जाएगा।
शिव शरीर हैं;      शक्ति प्राण हैं:-
शिव पुरुष हैं;                         शक्ति प्रकृति।
शिव सूर्य हैं;                          शक्ति उसकी ऊर्जा।
शिव प्रकाश हैं;                      शक्ति तेज़।
शिव कारण हैं;                     शक्ति कारक।
शिव संकल्प करते हैं;          शक्ति संकल्प सिद्धी।
शक्ति जागृत अवस्था हैं;   शिव सुशुप्तावस्था।
शक्ति मस्तिष्क हैं;              शिव हृदय।
शिव ब्रह्मा हैं;                      शक्ति सरस्वती।
शिव विष्णु हैं;                       शक्त्ति लक्ष्मी।
शिव महादेव हैं;                    शक्ति पार्वती।
शिव रुद्र हैं;                           शक्ति महाकाली।
शिव सागर के जल के सामान हैं तथा शक्ति लहरो के सामान। लहरे जल का वेग होती हैं। जल के बिना लहर का क्या अस्तित्व है? और वेग बिना सागर अथवा उसके जल का? यही है   शिव एवं उनकी शक्ति का संबंध। आओ कृपा प्राप्त करें शिव-शक्ति के इस अर्धनारीश्वर स्वरूप की पूजन के निम्न उपयो द्वरा।
शिव-शक्ति मिलन-महासंयोग-[अर्धनारीश्वर]:-
शिव-शक्ति के मिलन के महासंयोग को [अर्धनारीश्वर]योग कहा जाता है। यह योग मे ही भागबान अर्धनारीश का रूप बनता है। अत:इस योग मे पूजा करने से जो लाभ प्राप्त होता है वही लाभ भगबान अर्धनारीश्वर  की पूजा से प्राप्त होता है।
अर्धनारीश्वर योग क्या है ?:-
शुक्रवार के दिन ज्येष्ट मास मे कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी,चंद्रमा कृतिका नक्षत्र मे,देव गुरु मीन राशि मे और शनि कन्या मे स्थापित हों।यह अंत्यन्त ही दुर्लभ योग है,अर्धनारीश्वर योग। ऐसा योग ’60′साल मे एक ही बार बनता है।
इस योग मे ही समस्त प्रकार की सिद्धियों की प्राप्ति होती है,जब ऐसा योग बनता है तब भगबान शिव प्रश्न्नचित मुद्रा मे समस्त सिद्धियों को प्रदान करने बाले होते हैं।शात्र कहते हैं कि:-
1-
इस योग मे ही शुक्राचार्य ने शिव से संजीवनी विधा प्राप्त कि थी।
2-
इस योग मे ही मेघनाथ ने शिव से महापाश अस्त्र प्राप्त किया था।
3-
इस योग मे ही भस्मासुर ने महादेव से भस्म करने कि शक्ति प्राप्त कि थी।
इस योग मे पूजा करने से:-
01-108 महाशिवरात्रि के बराबर फल प्राप्त होता है।
02-
शनि का कोप शांत होता है।
03-
मुकदमों मे सफलता प्राप्त होती है।
04-
संतान कि प्राप्ति होती है।
05-
उत्तम वर-वधू कि प्राप्ति होती है।
06-
नौकरी कि समसस्य का समाधान होता।
07-
धन कि प्राप्ति होती है।
08-
माता-पिता से मधुर संबंध होते हैं।
09-
राजनित मे सफलता प्राप्ति होती है।
10-
समाज मे प्रतिष्ठा कि प्राप्ति होती है।
11-
दामपत्य जीवन सुखी बनता है तथा शिव-शक्ति के साथ-साथ होने से सदा-सुहागिन होने का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है।
12-विधार्थियों के लिए विधा लाभ प्राप्त प्राप्त होता है,मंद बुद्धि को बुद्धि-ज्ञान प्राप्त होता है।                              13-मानसिक एवं शारीरिक कष्टों से मुक्ति साथ ही समस्त प्रकार की तंत्र-मंत्रों से सम्बन्धित व्याधियाँभी दूर होती हैं। क्योंकि इस योग मे ही भगबान शिव ने पार्वती को समस्त रहस्य बतलाए हैं,समस्त तंत्र-मंत्रों का सार भी भगबान शिव ने पार्वती को बतलाया है। समस्त तंत्र पुस्तकों की उत्पत्ति भी इसी योग मे ही हुई है।
अत: आप इस योग मे पूजा करने से समस्त प्रकार की सिद्धियों को प्राप्त कर माला-माल हो सकते हैं।
धन प्राप्ति के लिए:-
स्फटिक के शिवलिंग को चाँदी के वर्तन मे रख कर गंगा जल,दूध,दही,शहद,घी, इन पाँच चीजों से स्नान कराएं तथा साफ कपड़े से साफ कर यगोपवीत धरण कराएं।इसके बाद शिवलिंग को भागबान
का रूप मान कर तथा जलहरी(अरघा) को माता का रूप मान कर पूजा करें। माता को रोली का टीका लगाए शिव को भस्म का टीका लगाए,माता को लाल रंग का फूल चढाये,शिव को सफ़ेद रंग का फूल अर्पण करें।चन्दन\मोंगरे की धूप बत्ती,बेलपत्र और बेल(फल) भगबान को अर्पित करें.और इस मंत्र का जाप करें:———————- ॐ ब्रषभ ध्वजाय सोमय सोमनाथये संभवे: ———-
दामपत्य जीवन को सुखी बनाने के अर्धनारीश्वर पूजा:-
भगबान अर्धनारीश्वर के मंदिर मे या किसी पुराने शिव मंदिर मे जाकर 108 देसी घी के दीपक जलाए ,आपका मुख पूर्व या उत्तर की और होना चाहिए। आप स्त्री हैं तो आप जलहरी(अरघा) को स्नान करा कर रोली चावल का टीका लगाए,और यदि अर्धनारीशवर मंदिर मे हैं तो आप माता को सम्पूर्ण शृंगार अर्पण करें,और माता दुर्गा के सप्तसती मे दिये 108 नामो का जाप करें। यदि पुरुष है तो आप भगबान को जल और गाय का दूध अर्पण करें,अवीर-गुलाल का टीका लगाएँ ऐसा करने से आपका दामपत्य जीवन सुखी बनेगा।
सुहाग की रक्षा तथा दीर्घ आयु के लिए:-
दीर्घ आयु के लिए महामृतुंजय मंत्र का जाप कम से कम एक माला प्रतिदिन करें,शिवलिग पर जल,सफ़ेद फूल चढाये तथा शिव मंदिर मे शिव चालीसा का पाठ अवश्य करें और सुहाग की रक्षा के लिए स्त्रियाँ माता को चुनरी,16 शृंगार(समस्त सुहाग का सामान)और लाल रंग का पुष्प अर्पित करें साथ ही सोमवार का व्रत तथा माह मे एक बार पूर्णमासी को कन्या पूजन तथा गरीबों मे भोजन बना हुआ बांटे।
उत्तम वर-वधू की प्राप्ति के लिए:-
आप अविवाहित स्त्री हैं,और आपको मन चाहे वर की तलाश है तो जलहरी को स्नान करा कर घी का दीपक जलाकर माता के 108 नामो के जप करके प्रत्येक नाम के साथ माता को रोली चावल का टीका लगाएँ। ऐसा आप प्रतिदिन प्रत:काल स्नान करके शुद्ध वस्त्र धारण कर पूरे मन और लगन से करें आपको मनचाहें वर की अवश्य ही प्राप्ति होगी। यदि आप अविवाहित पुरुष हैं तो घी का दीपक जलाये,तथा शिव को गाय का दूध\जल को शिव को अर्पण करें,पाँच प्रकार के ऋतु फल और सफ़ेद पुष्प अवीर और गुलाल का टीका लगाए । और इस मंत्र का जाप करें ————— ॐ नामो रुद्राये नीलाये भीमाये—————–
याद रहे स्त्री का अपमान सदा के लिए त्याग दे। इसको संध्या के समय करें।आपको मनचाही वधू प्राप्त होगी।
नौकरी की समस्या के समाधान के लिए:-
पारे के या पत्थर के शिव लिंग के लिए चांदी के बर्तन मे रख कर प्रीत सुबह के जल,दही,दूध,घी,एवं चीनीसे स्नान कराएं। गुलाब की माला भागबान को अर्पण करें,पाँच मुखी रुद्राक्ष की माला,और 108 बेलपत्रों पर ॐ नाम: शिवाय लिखकर भगबान को चढाये। पूर्ण फल नारियल को एक साफ कपड़े मे लपेट कर घर मे रख ले नौकरी लगे पर गंगा मे प्रवाहित कर दें।ऐसा करने राजनीत मे सफलता पद की प्राप्ति,माता-पिता से मधुर संबंध वनते हैं।
शनि का कोप शांत होता है:-
प्रतिदिन स्नान करने के पश्चात शिव मंदिर मे 108 बेलपत्रों पर ॐ नमः शिवाय लिखकर चड़ाने चाहिए,साथ ही शिव चालीसा और दुर्गा  चालीसा का पाठ प्रतिदिन करें तथा गरीवो को भोजन कराएं  और दान दें, छल,कपट एवं झूठ को त्यागने से शनि शांत होता है।
सन्तान प्राप्ति के लिए:-
शिव मंदिर मे भगबान को जल,सफ़ेद फूल,फल,अर्पित कर भगबान के अर्धनारीश्वर स्त्रोत का पाठ करें और माता को  रोली का टीका लगा कर लाल फूल अर्पन करे,घर पर शिव और दुर्गा चालीसा का पाठ मन से करें,गरीबों मे अन्न,फल का दान और गाय को घी की रोटी खिलाएँ,ऐसा आप प्रतिदिन करें। और स्त्रियों का सम्मान करें। आपको अवशय ही सुंदर-सदाचारी संतान प्राप्त होगी।
तंत्र-मंत्र से सम्बंधित व्याधियो के लिए:-
भगवान् श्री अर्धनारीश्वर के सम्मुख एक देसी घी का दीपक जला कर प्रभु को अर्पण करे तथा भगवन की प्रार्थना जो स्मारिका मैं दी गयी है, उसका जाप करने से प्रभु की कृपा सीधी प्राप्त होती है, जिससे सभी प्रकार की मनोकामनाए सहज ही संभव हो जाती है।  अतः जिन भक्तो के घर मे अशांति, मानसिक तनाव या अन्य किसी प्रकार की कोई भी समस्या है,वह प्रभु के सम्मुख एक जोडा लौग और एक बताशे पर कपूर के साथ जलाकर अर्पण करे, तथा स्मारिका मैं लिखी प्रार्थना करे तो कष्टों से आसानी से ही मुक्ति प्राप्त हो जाती है। इसी के साथ यदि भक्तगण तुलसी पर जल चढ़ाये  तथा उस चढ़ाये जल को घर के अन्दर से बहार की और छिड़कते हैं तो अनेको प्रकार की वह  व्याधियाँ  जो तंत्र -मंत्र से सम्बंधित होती हैं, स्वत:दूर हो जाती हैं साथ ही ॐ तत-सत  का जाप करने से कोई भी साधारण मनुष्य भक्ति एवं मुक्ति का सरल मार्ग अपनाकर ग्रहस्त जीवन के समस्त दायित्वो  को पूर्ण करते हुए, परम-तत्व मैं विलीन हो सकता हैं अर्थात मोक्ष प्राप्त कर सकता है।
ब्रहम्मा जी ने भगबान अर्धनारीश्वर को प्रसन्न करने लिए जिस स्त्रोत्र का पाठ किया वह यही अर्धनारीश्वर स्त्रोत्र है। इसका पाठ करने से जैसे ब्रहम्मा जी की समस्या को भगबान ने खत्म कर उनकी सिद्धि को पूर्ण किया है। ठीक वैसे ही इस स्त्रोत्र का पाठ आप सभी भक्तों की मनो कामनाओ को भी पूर्ण करता है। भगबान अर्धनारीश्वर मन और लगन से की गई पूजा,साधना एवं भक्ति से शीघ्र प्रसन्न होते हैं।
चाम्पेयगौरार्धशरीरकाये कर्पूरगौरार्धशरीरकाय
धम्मिल्लकायै च जटाधराय नमः शिवायै च नमः शिवाय
चम्पाके पुष्प समान गौर अर्ध शरीरवाले पार्वतीजीको एवम कर्पूर समान गौर अर्ध शरीरवाले शिवजीको, मोती और फूलोसे सुशोभित केशवाले [धम्मिल्लकायै] शिवाको एवम जटावाले शिवजीको प्रणाम
कस्तूरिकाकुंकुमचर्चितायै चितारजःपुंजविचर्चिताय
कृतस्मरायै विकृतस्मराय नमः शिवायै च नमः शिवाय
कस्तुरी और कुमकुमसे लिपटे हुए पार्वतीजीको एवम चिताकी राखके ढेरसे लिपटे हुए शिवजीको, कामदेवको जगानेवाले शिवाको एवम कामदेवका नाश करनेवाले शिवजीको प्रणाम.
चलत्क्रणत्कंकणनूपुरायै पादब्जराजत्फणिनूपुराय
हेमांगदायै भुजगांगदाय नमः शिवायै च नमः शिवाय
जिनके हाथमें खनकते हुए कंगन और पैरमें नूपुर है एवम जिनके चरणकमलमें सर्परूपी नूपुर हैऔर जिनकी भूजा पर सोनेके बाजुबंद [अंगद] लिपटे हुए है ऐसे शिवाको एवम जिनकी भूज पर सर्पोके बाजुबंद लिपटे हुए है ऐसे शिवजीको प्रणाम
विशालनीलोत्पललोचनायै विकासिपंकेरुहलोचनाय
समेक्षणायै विषमेक्षणाय नमः शिवायै च नमः शिवाय
प्रसन्न नीलक्मल समान नेत्रवालेको एवम संपूर्ण तरहसे विकसित कमल समान नेत्रवालेको, दो नेत्रवाले शिवाको और त्रिनेत्रवाले शिवजीको प्रणाम
मन्दारमालाकलितालकायै कपालमालांकितकन्धराय
दिव्याम्बरायै च दिगम्बराय नमः शिवायै च नमः शिवाय
जिनके घुंघराले बाल मंदार पुष्पोकी मालासे सुशोभित है एवम जिनकी गरदन खोपडीओंकी मालासे सुशोभित है, जिसने दिव्य वस्त्र धारण किये हो एवम जिसने दिशाओंके वस्त्र धारण किये याने निःवस्त्र हो ऐसे शिवा शिवको प्रणाम
अम्भोधरश्यामलकुन्तलायै तडित्प्रभाताम्रजटाधराय
निरीश्वरायै निखिलेश्वराय नमः शिवायै च नमः शिवाय
जिनके श्यामल केश जलसे भरे बादल [अम्भोधर] समान है एवम जिनकी ताम्रवर्णीय जटा चमकीली बीजली समान है, जो हंमेशा स्वतंत्र है यानी जिनके कोई ईश्वर नहीं है एवम जो सर्व लोकके स्वामी है ऐसे शिवा शिवको प्रणाम
प्रपंचसृष्ट्युन्मुखलास्यकायै समस्तसंहारकताण्डवाय
जगज्जनन्यै जगदेकपित्रे नमः शिवायै च नमः शिवाय
जो विश्वप्रपंचके सर्जनके अनुकूल नृत्य करनेवालेको एवम समस्त विश्वप्रपंचका संहार करनेवाला तांडव नृत्य करनेवालेको, विश्वमाताको एवम विश्वपिताको अर्थात शिवा शिवको प्रणाम
प्रदीप्तरत्नोज्जवलकुण्डलायै स्फुरन्महापन्नगभूषणाय
शिवान्वितायै च शिवान्विताय नमः शिवायै च नमः शिवाय
जिन्होंने अति झगमगते रत्नोके उज्जवल कुंडल पहने है एवम जिन्होंने अति भयानक सर्पोंके आभुषण पहने है, जो शिवजीसे समन्वित हुए हो एवम जो शिवासे शिवा [पार्वतीजी]से समन्वित हुए हो ऐसे शिवा शिवको प्रणाम
एतत्पठेदष्टकमिष्टदं यो भक्त्या स मान्यो भुवि दीर्घजीवी
प्राप्नोति सौभाग्यमनन्तकालं भूयात्सदा तस्य समस्तसिद्धिः
जो मनुष्य यह ईष्ट वस्तुका प्रदान करनेवाला अष्टकका भक्तिपूर्वक पाठ करता है वह संसारमें सन्मानित होता है, दीर्घायु होता है, अनंत काल तक वह सौभाग्य प्राप्त करता है एवम उसको हम्मेश समस्त सिद्धि प्राप्त होती है
हे! परमपिता परमेश्वर, हमारी रक्षा करो।
हम मन, वचन एवं कर्म से तुम्हे अथवा तुम्हारी सत्ता को स्वीकार करके ,
स्वम को तुम्हारे अधीन करते हैं। अतः आप हमारे कष्टों का निवारण करें।
हे! जन्मदाता समस्त दैव – अदैव जीव एवं शक्तियां तुम्हारे अधीन हैं और
तुम सबके स्वामी हो, तुम्हारा तेज़ करोडो-अरबो सूर्य चन्द्र एवं तारों से भी
अधिक दीप्तमान हैं,  जिसे हम मानव क्या ?  स्वम् देवताओं को भी सहन
करना कठिन ही नहीं असंभव है, तो हे!महातेजस्वी तुम्हारी करुणा के अंश
मात्र से ही मेरे समस्त कष्ट दूर हो सकते हैं । अतः मेरे कुटुंब,  समाज एवं
स्रष्टि के समस्त जीवों पर अपनी करुणा एवं दया की स्नेह द्रष्टि बनायें रखे,
ऐसी हमारी प्रार्थना, एवं अभिलाषा हैं।?
ॐ श्री अर्द्धनारीश्वरय नमः

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